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Sunday, 17 May 2020

ग्रामीणों ने स्वयं बनाया क्वारंटीन सेंटर

कोटी-माला गांव में ग्रामीणों ने स्वयं बनाया क्वारंटीन सेंटर

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में अगस्त्यमुनि ब्लॉक के तल्लानागपुर पट्टी के ग्राम पंचायत कोटी-मदोला में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने आपसी सहयोग से सुविधायुक्त होम  क्वारंटीन सेंटर तैयार किया है।

यहां 14 दिन तक रहने वाले लोगों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। लॉकडाउन में प्रदेश समेत बाहरी राज्यों से प्रवासी अपने-अपने गांव पहुंच रहे हैं। इसको देखते हुए ग्राम पंचायत कोटी-मदोला के क्षेत्र पंचायत सदस्य,  ग्राम प्रधान व ग्रामीणों ने सहभागिता से होम क्वारंटीन सेंटर बनाया है। इस सेंटर को बनाने के लिए गांव के चंद्रमोहन सिंह नेगी ने टेंट नि:शुल्क दिया है।


Self Corontine Center
Self Corontine Center

खाने की भी व्यवस्था

जबकि ज्येष्ठ प्रमुख सुभाष नेगी ने सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इसके अलावा सेंटर में टेलीविजन, पंखा, अलग-अलग शौचालय/बाथरूम की भी व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही यहां आने वाले लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई है।

क्षेत्र पंचायत सदस्य व अगस्त्यमुनि ब्लॉक के ज्येष्ठ प्रमुख सुभाष नेगी, ग्राम प्रधान रोशनी देवी ने  बताया कि ग्रीन जोन से आने वाले प्रवासियों को यहां होम क्वारंटीन किया जाएगा, जबकि रेड जोन से आने वाले प्रवासियों के लिए गांव में क्वारंटीप सेंटर तैयार किया जा रहा है। नोडल अधिकारी भगत सिंह नेगी ने कहा कि क्वारंटीन सेंटर में 20 लोगों के रहने की व्यवस्था की गई है।

Friday, 15 May 2020

परियों की नगरी..!


परियों की कहानियां बचपन में तो आपने जरूरी पढ़ी और सुनी होगी। कहते हैं परियां बहुत ही सुंदर होती हैं और जिन पर मेहरबान हो जाएं उसे मालामाल बना देती हैं। इंसानों से इनके प्रेम के किस्से भी पहड़ों पर सुनाए जाते हैं। तो किस्सों की दुनिया से आगे निकलते हुए एक ऐसी जगह की ओर चलते हैं जहां आज भी लोग परियों और वनदेवियों को देखने का दावा करते हैं।

परियों की हसीन दुनिया में हम जहां आपको लेकर जा रहे हैं वह दिल्ली से बहुत दूर नहीं है। उत्तराखंड के ऋषिकेश से आप सड़क मार्ग से गढ़वाल जिले के फेगुलीपट्टी के थात गॉव तक किसी सवारी से पहुंच सकते हैं। यहां से पैदल परियों की नगरी तक यात्रा करनी पड़ती है।
Khaint Parvat
Khaint Parvat


थात गांव के पास ही गुंबदाकार का पर्वत है जिसे खैट पर्वत कहते हैं। समुद्रतल से करीब 10000 फीट की ऊचाई पर यह पर्वत जन्नत से कम नहीं है। कहते हैं यहां लोगों को अचानक ही कहीं परियों के दर्शन हो जाते हैं। लोगों का ऐसा मानना है कि परियां आस-पास के गांवों की रक्षा करती हैं।

थात गॉव से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर खैटखाल नाम का एक मंदिर है जिसे यहां के रहस्यों का केन्द्र माना जाता है। यहां परियों की पूजा होती है और जून के महीने में मेला लगता है।

परियों को चटकीला रंग, शोर और तेज संगीत पसंद नहीं है इसलिए यहां इन बातों की मनाही है। यहां एक जीतू नाम के व्यक्ति की कहानी भी काफी चर्चित है। कहते हैं जीतू की बांसुरी की तान पर आकर्षित होकर परियां उसके सामने आ गईं और उसे अपने साथ ले गईं।

यहां एक रहस्यमयी गुफा भी है जिसके बारे में कहा जाता है कि इसके आदि अंत का पता नहीं चल पाया है। इस स्थान का संबंध महादेव द्वारा अंधकासुर और देवी द्वार शुंभ निशुंभ के वध से भी जोड़ा जाता है। कुछ लोग अलौकिक कन्याओं को योगनियां और वनदेवी भी मानते हैं।


जो भी है यहां रहस्य और रोमांच का अद्भुत संगम है। अगर रोमांच चाहते हैं तो एक बार जरूर यहां की सैर कर आएं। परियां मिले ना मिले लेकिन आपका अनुभव किसी परिलोक की यात्रा से कम नहीं होगा।


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Monday, 11 May 2020

बहने लगी पलायन की उलटी गंगा..!

अविस्मरणीय,अतुलनीय,अद्दभुत,अलौकिक
अतिथि देवो भव...घर बौडी ह्वे गै पहाड़
जो सड़क शहर को जाती है
वही सड़क गाँव को आती है
लौटने की इच्छा हो तो यहां स्वर्गलोक है..!!