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Tuesday, 19 May 2020

लैंसडाउन Beautiful Hill Station

लैंसडाउन खूबसूरत हिल स्टेशन


उत्तराखंड राज्य के पौड़ी जिले में स्थित लैंसडाउन एक छावनी शहर है। जिसकी खूबसूरत देखते ही बनती है। उत्तराखंड के गढ़वाल जिले में स्थित लैंसडाउन बेहद खूबसूरत पहाड़ी हिल स्टेशन है।

यहां का मौसम पूरे वर्ष बेहद सुहावना रहता है।  हर तरफ हरियाली आपको अलग दुनियां का एहसास कराती है। लैंसडाउन की ऊंचाई समुद्रतल से लगभग 1706 मीटर है। कहा जाता है कि इस जगह को अंग्रेजों ने पहाड़ों को काटकर बसाया था।

औपनिवेशिक काल के दौरान यह स्वतंत्रता सेनानियों का प्रमुख स्थान था। अंग्रजों ने इस स्थान का गढ़वाल राइफल्स प्रक्षिक्षण केद्र के रूप् में विकसित किया। आज यहां भारतीय सेना का गढ़वाल राइफल्स कमांड ऑफिस स्थित है।

हरे भरे देवदार के जंगलों से घिरा यह हिल स्टेशन सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। साथ ही, यह पर्यावरणीय पर्यटन के लिए भी उत्तम स्थान है।

इसकी स्वस्थ जलवायु और प्राकृतिक सुंदरता से आकर्षित होकर, उन्होंने यहां एक छावनी की स्थापना की। भारतीय सेना की प्रसिद्ध गढ़वाल राइफल्स का यहां कमांड ऑफिस है।

lansdown

लैंसडाउन जाने के लिए बेस्ट टाइम 

वैसे तो लैंसडाउन में मौसम सालभर ही सुहावना रहता है। यहां गर्मी भी ज़्यादा नहीं पड़ती। मार्च से जून के बीच यहां काफी खुशनुमा मौसम रहता है, वहीं दिसंबर से फरवरी के बीच कड़ाके की ठंड पड़ती है। कई बार तापमान शून्य तक चला जाता है। हालांकि सर्दियों के दौरान बर्फबारी देखने लायक होती है।

फरवरी-मार्च के दौरान यहां शिवरात्रि का सेलिब्रेशन होता है, जिसका दृश्य काफी मनोरम होता है। लैंसडाउन जाने के लिए सबसे बेस्ट टाइम है मार्च से नवंबर के बीच। उस वक्त न तो गर्मी होती है और न ही ज़्यादा ठंड

लैंसडाउन के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल

वीकएंड पर अगर आप लैंसडाउन जा रहे हैं, तो जाहिर है आपके पास वक्त की कमी होगी, लेकिन यह वक्त छोटे से लैंसडाउन को घूमने के लिए काफी है। इतने वक्त को आप चाहें, तो किसी होटल के गार्डन में सुस्ता कर बिता लें या लैंसडाउन के चक्कर काटकर, क्योंकि इस छोटे से हिल स्टेन में देखने लायक सभी जगह काफी नजदीक हैं।

भुल्ला ताल: 

होटल में अपना सामान रखकर आप भुल्ला ताल का रुख कर सकते हैं, जो एक छोटी सी झील है। मन करे, तो इसमें बोटिंग कर लें या इसके किनारे पार्क में बैठकर हंसते-खेलते पर्यटकों की खुशी में शामिल हो जाएं।

bhula tal
bhula tal

टिप एन टॉप: 

मन करे, तो टिप एन टॉप चले जाएं, जहां से दूर-दूर तक पर्वतों और उनके बीच छोटे-छोटे कई गांव नजर आते हैं। इनके पीछे से उगते सूरज का नजारा अलौकिक लगता है। अगर मौसम साफ हुआ, तो बर्फ से ढके पहाड़ों की लंबी श्रृंखला नजर आ सकती है। वैसे अक्टूबर-नवंबर और मार्च-अप्रैल में मौसम साफ रहने की संभावना ज्यादा रहती है।

view point
view point


चर्च और वॉर मेमोरियल: 

कुछ वक्त टिफिन टॉप में बिताने के बाद चर्च देख सकते हैं। गढ़वाल राइफल्स की वीरगाथा की झलक पाने के लिए शाम 5 बजे से पहले वॉर मेमोरियल देख सकते हैं। इसके बिल्कुल पास में है, परेड ग्राउंड, जिसे आम पर्यटक बाहर से ही देख सकते हैं।

church
church

मंदिर: 

शाम को सनसेट का खूबसूरत नजारा देखने के लिए संतोषी माता के मंदिर जाएं, जो शायद लैंसडाउन की सबसे ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। लैंसडाउन में घूमने का दोगुना लुत्फ चाहें, तो पैदल घूमें।



temple
temple

temple
temple

ताड़केश्वर मंदिर: 

अगली सुबह लैंसडाउन से कुछ किलोमीटर की दूरी पर भैरवगढ़ी या ताड़केश्वर मंदिर तक ट्रेकिंग कर सकते हैं। दोनों जगहों तक गाड़ी से भी जा सकते हैं, लेकिन चीड़, देवदार, बुरांश और बांज के घने जंगलों से ट्रेकिंग करते हुए यहां तक पहुंचने का अलग ही रोमांच है।


temple
temple




रोमांच भी, सुकून भी: कई पर्यटक लैंसडाउन में हफ्ते भर रहना पसंद करते हैं, क्योंकि यह शांत और खूबसूरत होने के साथ ही विकसित भी है। भारत में इस तरह के हिल स्टेशन बहुत कम हैं। कुछ पर्यटकों के लिए ट्रेकिंग, बाइकिंग, साइकलिंग जैसे एडवेंचर करने की सुरक्षित जगह है लैंसडाउन, तो कुछ पर्यटक फैमिली के साथ वीकएंड मनाने के लिए यहां आते हैं।



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Friday, 15 May 2020

सुरकंडा देवी का मंदिर।

उत्तराखंड के टिहरी जनपद में स्थित जौनुपर के सुरकुट पर्वत पर स्थित सुरकंडा देवी का मंदिर। यह स्‍थान समुद्रतल से करीब तीन हजार मीटर ऊंचाई पर है। आगे जानिए, इस मंदिर की स्‍थापना की रोचक कहानी।


Surkanda Devi
Surkanda Devi

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब हिमालय के राजा दक्ष ने कनखल में यज्ञ का आयोजन किया, तो अपने दामाद भगवान शिव को निमंत्रण नहीं भेजा। ऐसे में दक्ष की बेटी और भगवान शिव की पत्नी देवी सती नाराज हो गई।

अपने पति के अपमान के आहत माता सती ने राजा दक्ष के यज्ञ में आहूति दे दी। इससे भगवान शिव उग्र हो गए। उन्होंने माता सती का शव त्रिशूल में टांगकर आकाश भ्रमण किया। इस दौरान नौ स्‍थानों पर देवी सती के अंग धरती पर पड़े। वे स्‍थान शक्तिपीठ कहलाए।

Surkanda Devi
Surkanda Devi

इसी में देवी सती का सिर जहां गिरा। वह स्‍थान माता सुरकंडा देवी कहलाया। पौराणिक मान्यता है कि देवताओं को हराकर राक्षसों ने स्वर्ग पर कब्जा कर लिया था। ऐसे में देवताओं ने माता सुरकंडा देवी के मंदिर में जाकर प्रार्थना की कि उन्हें उनका राज्य मिल जाए। उनकी मनोकामना पूरी हुई और देवताओं ने राक्षसों को युद्घ में हराकर स्वर्ग पर अपना आधिपत्य स्‍थापित किया।

Surkanda Devi
Surkanda Devi


Surkanda Devi
Surkanda Devi


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Monday, 11 May 2020

फलासी तुङ्गनाथ



यहाँ पर भगवान तुंगनाथ का प्राचीन मन्दिर है। फलासी ... मन्दिर में भगवान शिव (तुंगनाथ) का आपरुप (ऐसी मूर्ति, लिंग आदि जो मनुष्य निर्मित न होकर स्वयं प्रकट होती है) लिंग है। ... साथ में गणेश देवता की डोली जाती है जिसे ब्राह्मण ले जाता है।


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English Translation :

There is an ancient temple of Lord Tungnath here. Falasi ... The form of Lord Shiva (Tungnath) in the temple (such an idol, linga etc. which is not man-made and manifests itself) is the linga. ... together with the Ganesha Doli Doli which is taken by the Brahmin.